Home India कैसे पहले तेजी से बढ़ा पाकिस्तान का स्पेस प्रोग्राम फिर हो गया...

कैसे पहले तेजी से बढ़ा पाकिस्तान का स्पेस प्रोग्राम फिर हो गया फुस्स

33
0

हाइलाइट्स

पाकिस्तान ने 60 के दशक में जब अंतरिक्ष में कुछ कुछ सालों के अंतराल पर तीन रॉकेट छोड़े तो दुनियाभर में तहलका मच गया
पाकिस्तान के जनरल अयूब खान ने स्पेस प्रोग्राम में रुचि ली. अब्दुस सलाम काबिल अंतरिक्ष वैज्ञानिक थे लेकिन फिर सब खत्म हो गया

जब भारत ने 14 जुलाई को चंद्रयान -3 को श्रीहरिकोटा से अपने स्वदेशी रॉकेट से लांच किया. फिर ये सफलता पूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो गया. इस खबर के बाद पाकिस्तान में दो तरह की प्रतिक्रियाएं हुईं. कुछ लोगों ने अपनी सरकार का मजाक उड़ाते हुए तहत तरह के मीम्स बनाने शुरू कर दिए. रॉकेट के आकार का एक गुब्बारा आकाश में छोड़ा गया. दूसरी तरफ ये रिएक्शन हुआ कि अपने अंतरिक्ष प्रोग्राम में पाकिस्तान क्यों पिछड़ गया.

आजादी के बाद से ही पाकिस्तान के साथ ये दिक्कत रही है कि वो लंबी लंबी बातें तो बहुत करता है लेकिन उसके ज्यादातर इस तरह के कार्यक्रम पटरी से उतरे हुए हैं. अंतरिक्ष को लेकर भी उसने भारत से कहीं पहले अपने स्पेस प्रोग्राम की शुरुआत की थी . अब तो इस मामले में इतना पिछड़ चुका है कि जब वो अंतरिक्ष या चांद पर जाने की बात करता है तो खुद उसके देश के लोग ही उसकी हंसी उड़ाने लगते हैं. आखिर क्यों पाकिस्तान अंतरिक्ष के मामले में टांय-टांय फिस्स हो गया?

हम सब ये जानते हैं कि भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो दुनिया की सबसे ताकतवर स्पेस एजेंसियों में एक है. अब इसकी गिनती दुनिया की पहली 04 स्पेस एजेंसियों में होने लगी है. लेकिन क्या आपने पड़ोसी देश पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी ‘सुपारको’ के बारे में कभी सुना है.

कब शुरू हुआ था पाकिस्तान का स्पेस प्रोग्राम
बहुत कम लोगों को मालूम है कि भारत से कई साल पहले शुरू हुआ था पाकिस्तानी स्पेस प्रोग्राम. सुपारको की स्थापना 1961 में हुई थी जबकि इसरो की स्थापना करीब इसके आठ साल बाद 1969 में हुई थी.

साल 1960 में पाक में सबसे बड़े शहर कराची में पाकिस्तान-अमरीकी काउंसिल का लेक्चर चल रहा था. इस काउंसिल के एक वैज्ञानिक ने अपने एक बयान से सबको चौंका दिया. उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान अब स्पेस एज में दाखिल होने वाला है. हम बहुत जल्द ही अंतरिक्ष में एक रॉकेट भेजने वाले हैं.’  ये वैज्ञानिक थे प्रोफ़ेसर अब्दुस सलाम.

तब पाकिस्तानी वैज्ञानिक के दावे ने खलबली मचा दी थी
उनके इस बयान ने इस पूरे ‘सब कॉन्टिनेंट’ और अंतरराष्ट्रीय जगत में खलबली मचा दी. दूसरे देशों के वैज्ञानिक पाकिस्तान की ये तरक्की के दावे पर दंग रह गए. ये वही वैज्ञानिक अब्दुस सलाम थे जो आगे चल कर विज्ञान के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार जीतने वाले पहले मुसलमान और पाकिस्तानी बने थे.

अयूब खान जब प्रेसिडेंट बने तो अब्दुस सलाम ने उन्हें पाकिस्तानी स्पेस प्रोग्राम को लेकर कई आइडियाज दिए थे. अयूब खान की भी दिलचस्पी इस क्षेत्र में थी, पाकिस्तान को लेकर उन्हें स्पेस में कई संभावनाएं उन्हें नजर आ रही थीं. तारीख 16 सितंबर 1961 को कराची में ‘सुपारको’ यानी पाकिस्तानी ‘स्पेस एंड अपर एटमॉस्फियर रिसर्च कमीशन’ की स्थापना हुई. इसमें अमेरिका ने भी पाकिस्तान की मदद करनी शुरू की.

सुपारको का दावा है कि बहुत जल्दी वह अपने स्पेस प्रोग्राम को फिर पटरी पर ले आएगा लेकिन फिलहाल की स्थिति में ये बहुत मुश्किल लग रहा है.

भारत से पहले छोड़ा था पहला रॉकेट
पाकिस्तान ने अपना पहला रॉकेट साल 7 जून 1962 में छोड़ा था. इस रॉकेट का नाम ‘रहबर-1’ था. सुपारको के इस रॉकेट का मुख्य मकसद मौसम के बारे में जानकारी जुटाना था. पर भारत इसके करीब एक साल बाद ऐसा कर सका.

इस रॉकेट लॉन्चिंग के बाद पूरे उपमहाद्वीप में पाकिस्तान ऐसा करने वाला पहला मुल्क बन गया था. साथ ही पूरे एशिया महाद्वीप में पाकिस्तान ऐसा तीसरा मुल्क. उस समय वो दुनिया का 10वां मुल्क था, जिसने अंतरिक्ष में सफलता पूर्वक रॉकेट छोड़ा था.

तब पाक वैज्ञानिक अब्दुल सलाम की तूती बोलती थी
ये वो दौर था जब विज्ञान जगत में अब्दुस सलाम की तूती बोलती थी. जानकार बताते हैं कि जनरल अयूब खान के दौर में पाकिस्तानी स्पेस कार्यक्रम काफ़ी आगे बढ़ा. उन दिनों अमेरिका और पश्चिमी देशों तक ने पाकिस्तान के स्पेस प्रोग्राम को सराहा था. पर पाकिस्तानी स्पेस प्रोग्राम का स्वर्णिम दौर केवल दस साल रहा. जनरल याह्या खान और प्रधानमंत्री ज़ुल्फिकार अली भुट्टो के दौर में प्राथमिकताएं तेज़ी से बदलीं. जनरल जिया-उल-हक और बाद के शासकों के आने के बाद ‘सुपारको’ बिल्कुल ही हाशिए पर चला गया.

पाकिस्तान ने पीछे ये दावा किया था कि वो जल्दी ही अपने अंतरिक्ष यात्री को स्पेस में पहुंचाएगा लेकिन ये दावा भी हवा हवाई ही निकला

फिर क्यों पीछे चला गया पाकिस्तान स्पेस प्रोग्राम
स्पेस प्रोग्राम की फंडिंग में लगातार कटौती होती रही. सुपारको को मिलने वाले पैसे अब सुरक्षा क्षेत्र में खर्च होने लगे थे. ये सिलसिला जनरल जिया-उल-हक में भी ऐसे ही चला. स्थिति ऐसी थी कि सारा पैसा एटॉमिक हथियार हासिल करने में खर्च हो रहा था. हालांकि पाकिस्तान अपने इस एटॉमिक प्रोग्राम काफी गुप्त तरीके से अंजाम दे रहा था ताकि दुनिया को इसकी भनक तक नहीं लगे. भारत पहले ही परमाणु परीक्षण कर चुका था.

पाकिस्तान का सारा फोकस एटम बम, मिसाइल तकनीक और फायटर जेट हासिल करने पर चला गया. जो बेहतरीन वैज्ञानिक थे वे एटोमिक परीक्षण के काम में लग गए और दूसरे मिसाइल बनाने में. और इस तरह पाकिस्तान का स्पेस कार्यक्रम अपने लक्ष्य से बहुत पीछे चला गया.

1980 के दशक में पाकिस्तान के मशहूर वैज्ञानिक मुनीर अहमद ख़ान ने जिया-उल-हक़ के साथ मिलकर सुपारको में नई जान फूंकने की कोशिश थी. कई नए मिशन लॉन्च किए गए, रिसर्च के लिए पैसे भी दिए गए. लेकिन बात बनी नहीं.

अब्दुस सलाम, जिनके रहते पाकिस्तान ने स्पेस प्रोग्राम में शुरुआती दौर में तेज छलांग लगाई थी

सुपारको असफताओं के चरम पर पहुंच गया
बाद में पाकिस्तान के स्पेस प्रोग्राम में जान डालने की कोशिश तो हुई लेकिन ये चीन की बैसाखियों पर ज्यादा चलाने की कोशिश हुई. पाकिस्तान के पहले सेटेलाइट बद्र-1 को 1990 में चीन से अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया था.

बद्र-1 के लॉन्च होते ही पाकिस्तान ने अपने दूसरे सेटेलाइट के लॉन्चिंग पर काम करने लगा. तीन साल तक काम करने के बाद भी सुपारको अपना दूसरे सेटेलाइट को तय समय पर तैयार नहीं कर सका. इसके बाद सुपारको को इसकी लॉन्चिंग रिशिड्यूल करनी पड़ी. फिर यूएस की मदद से 2001 में इसकी लॉन्चिंग हो पाई. इसका नाम पाकसैट-1ई था. पर सेटेलाइट पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ी नाकामयाबी साबित हुई. सुपारको दो सालों में ही इसपर नियंत्रण खो बैठा.

सुपारको के असफल होने के पीछे ये भी वजह है कि आगे चलकर इसके प्रमुख भी वरिष्ठ फ़ौजी अफ़सर होने लगे. रिसर्च का काम धीमा होता गया. मिसाल के तौर पर साल 2001 के बाद से सुपारको के चीफ पाकिस्तान फ़ौज के मेजर जनरल रैंक के अफ़सर होते रहे हैं.

वैसे पाकिस्तान सरकार ने वर्ष 2022-23 के अंतरिक्ष रिसर्च एंड प्रोग्राम के लिए सुपारको को बजट में 700 करोड़ रुपए दिए थे, जो शायद बहुत कम है.

टैग: चंद्रयान-3, पाकिस्तान, अंतरिक्ष

(टैग्सटूट्रांसलेट)चंद्रयान-3(टी)इसरो(टी)पाकिस्तान अंतरिक्ष कार्यक्रम(टी)पाकिस्तानी अंतरिक्ष कार्यक्रम विफल क्यों हुआ(टी)पाकिस्तान अंतरिक्ष रॉकेट(टी)सुपारको(टी)भारत बनाम पाकिस्तान

Source link

Previous article68 साल के हुए रोजर बिन्नी, 40 साल पहले भारत को जिताया पहला वर्ल्ड कप, BCCI ने दे रखी है अहम जिम्मेदारी
Next articleUPSC Recruitment Exam Date: यूपीएससी में इन पदों के लिए किए हैं आवेदन, तो यहां देखें एग्जाम शेड्यूल

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here