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अल नीनो का मॉनसून पर कोई असर नहीं, इस हफ्ते बारिश का नया दौर शुरू होगा, मध्य और पूर्वी भारत में जमकर बरसेंगे बादल

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हाइलाइट्स

अल नीनो का अभी तक मॉनसून पर कोई असर नहीं.
इस हफ्ते मॉनसून का एक और सक्रिय चरण शुरू होने की उम्मीद.
अगले पांच दिनों में मध्य और पूर्वी भारत में बहुत भारी बारिश की उम्मीद.

नई दिल्ली. विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक इस महीने की शुरुआत में अल नीनो (El Nino) की स्थिति बनी, लेकिन भारत में अभी तक मॉनसून पर इसका कोई असर नहीं देखा गया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department-IMD) ने रविवार को कहा कि पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी हवाओं के बीच संपर्क के कारण पिछले एक पखवाड़े में उत्तर भारत में बहुत ज्यादा बारिश हुआ और कई जगहों पर बाढ़ आई है. वहीं इस हफ्ते मॉनसून (Monsoon) का एक और सक्रिय चरण शुरू होने की उम्मीद है. उत्तरी ओडिशा और उससे सटे गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड पर एक कम दबाव का क्षेत्र बन गया है. जिससे अगले पांच दिनों में मध्य और आसपास के पूर्वी भारत में बहुत भारी बारिश (Very Heavy Rainfall) होने की उम्मीद है.

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक आईएमडी ने कहा कि पश्चिमी तट पर बारिश बढ़ेगी. जबकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित उत्तर पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में कम से कम दो दिनों तक भारी बारिश जारी रहेगी. आईएमडी के महानिदेशक एम महापात्र ने कहा कि ‘अगले एक हफ्ते तक हम मध्य भारत में सक्रिय मॉनसून की उम्मीद कर सकते हैं. वहां एक निम्न दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure Area) विकसित हो गया है. जबकि मंगलवार के आसपास एक और चक्रवाती परिसंचरण विकसित होगा. इससे अच्छी बारिश होगी और मध्य और प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश की कमी पूरी हो सकती है. वहीं पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण उत्तर भारत में भी बारिश जारी रहेगी.’

अल नीनो की स्थिति आमतौर पर मॉनसूनी बारिश को कम कर देती है. मगर भारत में अभी तक मॉनसून पर इसका कोई असर नहीं देखा गया है. हालांकि 1 जून के बाद से अब तक मॉनसूनी बारिश का इलाकों में वितरण बेहद विषम रहा है, मगर कुल मिलाकर बारिश की मात्रा में कोई कमी नहीं है. उत्तर पश्चिम भारत में 49 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है. वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 19 फीसदी कम बारिश हुई, जबकि प्रायद्वीपीय भारत में बारिश में 22 फीसदी की कमी देखी गई और मध्य भारत में 1 फीसदी की अधिकता रही.

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वहीं स्काईमेट वेदर के जलवायु और मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने कहा कि ‘कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण अब ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सहित पूर्वी और मध्य भारत में बारिश बढ़ेगी. कम दबाव क्षेत्र के गुजरात के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण के साथ संपर्क करने और पश्चिमी तट विशेष रूप से पूर्वी राजस्थान, गुजरात से विदर्भ तक बारिश होने की उम्मीद है. उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ भी है, जिसके इन प्रणालियों के साथ संपर्क करने की संभावना है जिससे पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और पहाड़ी हिस्सों में भी अच्छी बारिश होगी.’ बहरहाल फिर से बारिश तेज होने का आईएमडी का बयान ऐसे समय आया है जब हिमाचल प्रदेश, उत्तरी पंजाब के कुछ हिस्सों, हरियाणा और दिल्ली में अभूतपूर्व बारिश दर्ज की गई. पिछले हफ्ते हिमाचल प्रदेश में पुलों, राजमार्गों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ.

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