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इस मंदिर में पता चलता है भविष्य! 2020 में मानव मिट्टी घटी तो आया कोरोना, जानें इस साल क्या होगा?

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अरविन्द शर्मा/भिंड. जिले के उदोतगण गांव में राम जानकी मंदिर पर हर साले जुलाई में तौल कराई जाती है. इस दौरान मिट्टी से फसल के उत्पादन का अनुमान लगाया जाता है. आने वाले साल में क्या महंगा होगा, क्या सस्ता होगा इसका पता भी लगता है. साथ ही मानव और पशुओं के भविष्य का भी अनुमान लगाया जाता है. यह परंपरा कई साल से चली आ रही है.

मंदिर के पुजारी लखनदास महाराज बताते हैं कि गांव का यह रामजानकी मंदिर 300 साल प्राचीन है. यहां पिछले 250 साल से हर गुरु पूर्णिमा की शाम आरती के वक्त अनाज, मसाले आदि वस्तुओं के साथ ही मानव व पशु के नाम की 10-10 ग्राम मिट्टी रखते हैं. दूसरे दिन सुबह आरती के बाद यह मिट्टी और अन्य सामग्री उठा ली जाती है. उसके बाद बाहर से आए व्यापारी से मिट्टी के साथ सबको तोला जाता है.

10 ग्राम मिट्टी से पता चलता है भविष्य
मान्यता यह है कि अगर कोई भी सामग्री 10 ग्राम से कम होती है, तो अनुमान लगाते हैं कि उस फसल की पैदावार कम होगी, अगर कोई फसल वजन में बढ़ती है तो अनुमान लगाते हैं कि इस फसल की पैदावार बढ़ेगी. इसके अलावा मानव की मिट्टी और पशु की मिट्टी रखी जाती है अगर ये मिट्टी का वजन बढ़ता है तो अनुमान लगाया जाता है मानव की आबादी बढ़ेगी और मिट्टी घटती है तो फिर आबादी घटेगी. ठीक इसी तरह पशु की मिट्टी तोलकर पता लगाते हैं.

इस साल के आंकड़े
इस साल के पूर्वानुमान में आलू, मैथी, चना, मूंग, मूंगफली, उड़द, मैथी, चना, सोहा, तिल, धान घटी या बढ़ी नहीं है. गुड में 1.25 मिग्रा, सनबीजा में 75मिग्रा, मटर में 50 मिग्रा, सौंफ 225 मिग्रा, अरंडी 0.75 मिग्रा, जीरा 1 नग मिग्रा, मक्का 1.50 मिग्रा, ज्वार 1.50 मिग्रा, धनियां 2.0 मिग्रा, बाजरा 75 मिग्रा, मसूर 2.0 मिग्रा, मसूर 2.0 मिग्रा, अरहर 1.0 क मिग्रा, गेहूं 50 मिग्रा, ग्वार 75 मिग्रा व राजमा में 50 मिली ग्राम बढोत्तरी हुई है यानी इनकी उपज बढ़ेगी.

2020 में मानव मिट्टी घटी तो आया कोरोना
आषाढ़ी तौल के लिए हर साल पोरसा से व्यापारी को बुलाया जाता है जिसमें उसके द्वारा तौल कराते हैं. जसवीर सिंह भदौरिया कहते हैं कि इस साल मानव व पशु के नाम की मिट्टी मात्र 125 मिलीग्राम घटी, जबकि 2020 में 525 मिलीग्राम घटी थी. तब दुनिया भर में कोरोना ने कहर बरपाया था.

इस बार मानव-पशु की मिट्टी फिर घटी
पिछले साल के मुकाबले इस साल मानव-पशु की मिट्टी 1.25 – 1.25 मिलीग्राम घटी है, अनुमान लगाया जा रहा है इस बार मानव जीवन पर खतरा रह सकता है, वही पशु जीवन पर भी खतरा हो सकता है.

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