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Explainer – क्या होता है येलो, आरेंज और रेड अलर्ट का मतलब, चेतावनी जारी होने पर क्‍या करें तैयारी

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हाइलाइट्स

मौसम खराब होने की आशंका, खराब होने और बेहद खराब होने पर आईएमडी अलग-अलग अलर्ट जारी करता है.
सभी अलर्ट का मकसद लोगों को खराब मौसम से जुड़ी परेशानियों के प्रति सतर्क व निपटने की तैयारी करना होता है.

मौसम संबंधी चेतावनी: राजधानी दिल्‍ली में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. यमुना का जलस्‍तर लगातार बढ़ते हुए खतरे के निशान को पार कर चुका है. इससे बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और सामान्‍य जनजीवन अस्‍त-व्‍यस्‍त हो गया है. दक्षिण पूर्व दिल्‍ली से लेकर मध्य दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, उत्तर पूर्व दिल्ली तक के कई इलाके जलमग्‍न हो गए हैं. यमुना के डूब क्षेत्र में लाखों लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. सड़कों ही नहीं लोगों के घरों में भी पानी घुस गया है. वहीं, मुख्‍य मार्गों पर जलभराव के कारण लोगों को ट्रैफिक जाम की समस्‍या से जूझना पड़ रहा है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डूब क्षेत्र के लोगों से अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा है.

दिल्ली में यमुना का जलस्तर बृहस्‍पतिवार सुबह ही 208.46 मीटर तक पहुंच गया, जिसके शाम तक 208.75 मीटर तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. वहीं, पहाड़ी राज्‍यों में भारी बारिश के कारण भूस्‍खलन की घटनाएं हो रही हैं. कई जगहों पर भूस्‍खलन के कारण पर्यटक फंस गए हैं. हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्‍तराखंड में हुई भारी बारिश ने हालात खराब कर दिए हैं. ऐसे हालात में सरकार लोगों को सतर्क करने के लिए अलग-अलग रंग के अलर्ट जारी करती है. वैसे तो ये ग्रीन, येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट होते हैं. लेकिन, अमूमन ग्रीन अलर्ट जारी नहीं किया जाता है. जानते हैं कि अलग-अलग अलर्ट का क्‍या मतलब है और ये कब जारी किए जाते हैं?

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कब जारी किया जाता है येलो अलर्ट?
जब किसी राज्‍य में कई जगह पर भारी बारिश की आशंका होती है तो सरकार येलो अलर्ट जारी करती है. बता दें कि येलो अलर्ट में 64.5 से 115.5 मिमी तक बारिश होने की उम्‍मीद होती है. आम लोगों के लिए येलो अलर्ट का मतलब है कि उन्‍हें मौसम से जुड़ी सूचनाओं के बारे में अपडेट रहना चाहिए. मौसम विभाग की ओर से येलो अलर्ट जारी करने का मतलब है कि अभी कोई खतरा नहीं है, लेकिन मौसम कभी भी खतरनाक हालात बना सकता है. लिहाजा, लोगों को इसके लिए तैयार रहना चाहिए. इसका मकसद सिर्फ लोगों को मौसम के प्रति सतर्क करना रहता है. इसमें भारी बारिश के 2 घंटे तक होने की आशंका रहती है. साथ ही बाढ़ आने की आशंका भी रहती है.

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येलो अलर्ट लोगों को मौसम के प्रति सतर्क रहने और ऑरेंज अलर्ट किसी भी समस्‍या के लिए तैयार रहने के लिए जारी किया जाता है.

तेज हवा के साथ बारिश में ऑरेंज अलर्ट
ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने का मतलब है कि 115.6 मिमी से 204.4 मिमी तक बारिश हो सकती है. दूसरे शब्‍दों में कहें तो ऑरेंज अलर्ट के दौरान बहुत भारी बारिश हो सकती है. इसका सीधा मतलब है कि मौसम खराब हो गया और लोगों को हालात पर नजर बनाए रखने के साथ ही बाहर भी नहीं निकलना है. अगर बाहर निकलना बेहद जरूरी हो तो बहुत ज्‍यादा सावधानी के साथ निकलें. चक्रवातीय तूफान के दौरान हवा की रफ्तार 65 से 75 किमी प्रति घंटा होने की आशंका पर मौसम विभाग ऑरेंज अलर्ट जारी करता है. ऑरेंज अलर्ट के दौरान खतरनाक बाढ़ आने की आशंका बढ़ जाती है. ऑरेंज अलर्ट के दौरान मौसम से होने वाले सभी प्रभावों के लिए तैयार रहें.

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बहुत भारी बारिश के लिए रेड अलर्ट
जब किसी इलाके में या एक साथ कई इलाकों में बहुत भारी बारिश होती है, तो रेड अलर्ट जारी किया जाता है. इसे एक्टिवली हैवी रेनफॉल भी कहा जाता है. इसमें 204.4 मिमी से ज्‍यादा बारिश होने की आशंका रहती है. बादल फटने, नदियों का पानी खतरे के निशान से ऊपर जाने पर रेड अलर्ट जारी किया जाता है. इसके अलावा पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और पेड़ गिरने की घटनाएं होने पर भी रेड अलर्ट जारी किया जाता है. इस दौरान लोगों को जानमाल की सुरक्षा के लिए बहुत ज्‍यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है. रेड अलर्ट मौसम की खतरनाक स्थिति का संकेत होता है. हालांकि, बहुत गंभीर हालात बनने पर ही रेड अलर्ट जारी किया जाता है.

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मौसम ठीक होने पर ग्रीन अलर्ट
ग्रीन अलर्ट का मतलब है कि अब मौसम ठीक हो चुका है. आपको अब मौसम से जुड़ा कोई भी खतरा नहीं है. अमूमन ग्रीन अलर्ट जारी नहीं किया जाता है. अब जानते हैं कि अलर्ट जारी होने पर हमें किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि जानमाल का कम से कम नुकसान झेलना पड़े.

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रेड अलर्ट मौसम की खतरनाक स्थिति का संकेत होता है.

अलर्ट जारी होने पर क्‍या करना चाहिए
मौसम संबंधी अलर्ट जारी होने पर सबसे पहले अपने घर पहुंचना जरूरी है. अगर घर पहुंचना मुश्किल है तो तत्‍काल किसी सुरक्षित जगह पर पहुंच जाएं. फिर लगातार मौसम से जुड़ी अपडेटेड इंफॉर्मेशन जुटाते रहें. स्‍मार्टफोन्‍स ने ये काम अब काफी आसान कर दिया है. आजकल ज्‍यादातर एफएम चैनल और वेबसाइट्स मौसम से जुड़ी जानकारियों को लगातार अपडेट करते रहते हैं. मौसम खराब होने पर इलेक्ट्रिक उपकरणों का कम से कम या बेहद जरूरी होने पर ही इस्‍तेमाल करें. तेज हवा चल रही हो तो दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें और उनसे दूर रहना चाहिए. टॉर्च, बैंक कार्ड्स और मेडिकल किट साथ रखें.

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