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हिमाचल में भारी बारिश से कितनी तबाही? 50000 हजार पर्यटकों को बचाया और 1100 से ज्‍यादा सड़कें अब भी बंद, जानें ताजा अपडेट

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तुलसी बाबा

हिमाचल प्रदेश सरकार ने बुधवार को दावा किया कि पिछले तीन दिनों में कुल्लू और मनाली से लगभग 50,000 पर्यटकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है, लेकिन सैकड़ों लोग फंसे हुए हैं क्योंकि भूस्खलन और बाढ़ के कारण 1,100 से अधिक सड़कें अभी भी बंद हैं. मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए लाहौल-स्पीति जिला के सिस्सू, चंद्रताल और लोसर तथा कुल्लू जिले के मनाली क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया. मुख्यमंत्री ने सिस्सू और मनाली में विभिन्न क्षेत्रों में फंसे लोगों की सकुशल वापसी के बाद उनसे बातचीत की और कुशलक्षेम जाना. इस दौरान उन्होंने नेहरू कुंड के पास बाहंग स्थित हिमपात एवं हिमस्खलन अध्ययन प्रतिष्ठान (सासे) का भी दौरा कर वहां बारिश से हुए नुकसान की जानकारी ली. उन्होंने आश्वस्त किया कि घाटी में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालने के लिए सरकार की ओर से हरसंभव सहायता प्रदान की जा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि लाहौल घाटी के सिस्सू में फंसे मनाली के एक स्कूल के 52 बच्चों को सुरक्षित मनाली पहुंचाया गया है. इसके अतिरिक्त, कुल्लू तथा मनाली सहित विभिन्न स्थानों पर पिछले तीन दिनों से फंसे लगभग 50 हजार पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है.

मुख्‍यमंत्री ने बताया क‍ि मनाली-चंडीगढ़ मार्ग पर यातायात धीमा है, लेकिन प्रारम्भिक सूचना के अनुसार बुधवार शाम 4 बजे तक लगभग 6552 वाहन कुल्लू को पार कर चंडीगढ़ की ओर जा चुके हैं और कसोल तथा आस-पास के क्षेत्रों से भी आज जिला प्रशासन द्वारा लगभग 3000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है. खबरों के मुताबिक चंबा, शिमला, सिरमौर, किन्नौर और अन्य जिलों में बड़ी संख्या में पर्यटक फंसे हुए हैं. मोबाइल ‘कनेक्टिविटी’ बंद होने के बाद जो लोग अधिकारियों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे, वे अब पुलिस और जिला प्रशासन से संपर्क कर रहे हैं. लापता व्यक्तियों के ठिकाने की तलाश में सोशल मीडिया पर भी कई संदेश साझा किए गए हैं. मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के आठ शहरों – मनाली, सोलन, रोहड़ू, ऊना, घमरूर, पच्छाद, हमीरपुर और केलोंग में जुलाई में एक दिन की बारिश के पिछले सभी रिकॉर्ड टूट गए हैं. चार दिनों में किन्नौर तथा लाहौल और स्पीति जिलों में पूरे मानसून सीज़न की 43 प्रतिशत और 33 प्रतिशत बारिश हुई. राज्य में बुधवार को आठ लोगों की मौत की सूचना मिली, जिससे पिछले चार दिनों में भारी बारिश के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 39 हो गई है.


मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को लाहौल और स्पीति के चंद्रताल में फंसे पर्यटकों को निकालने को एक चुनौतीपूर्ण कार्य करार दिया. सिस्सू, मनाली, लोसार और चंद्रताल इलाके का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद उन्होंने कहा क‍ि हमने हालात का जायजा लेने के लिए मंत्री और मुख्य विधायी सचिव संजय अवस्थी को चंद्रताल भेजा है. उन्होंने कहा कि अवस्थी के साथ जनजातीय किन्नौर जिले के राज्य मंत्री जगत सिंह नेगी चंद्रताल में बचाव कार्यों में सहायता देंगे. नेगी, भौगोलिक स्थिति और जनजातीय आपदाओं से भलीभांति परिचित हैं.

होटल दे रहे हैं पर्यटकों को फ्री खाने का ऑफर
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से रामशीला चौक के पास लोगों के लिए खाद्य सामग्री वितरण की व्यवस्था भी की गयी है. उन्होंने कहा कि मनाली में लोगों को 6000 से अधिक भोजन के पैकेट वितरित किए गये हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी को चंद्रताल झील में फंसे लोगों तक पहुंचने और बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि चंद्रताल में स्थिति चुनौतीपूर्ण है लेकिन राज्य सरकार वहां विभिन्न कैम्पों में मौजूद सभी 293 लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है. ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इस क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों को फिर से बहाल करने के लिए त्वरित एवं ठोस कदम उठा रही है और सीमा सड़क संगठन के सहयोग से इसका कार्य पूरे जोरों पर है. कई होटल और पर्यटन इकाइयों ने फंसे हुए पर्यटकों को मुफ्त में रहने और खाने की पेशकश की है और सोशल नेटवर्किंग साइटों पर अपने होटल के पते और संपर्क नंबर साझा किए हैं.

होटल व्‍यवसायी भुगतान पर अड़े
प्राकृतिक आपदा की वजह से पर्यटकों के लिए छुट्टियां एक बुरे सपने की तरह थीं. बड़ौदा के एक पर्यटक ने कहा क‍ि हमारे पास सीमित नकदी थी, मोबाइल कनेक्टिविटी और बिजली बंद थी. एटीएम काम नहीं कर रहे थे और होटल व्यवसायी भुगतान को लेकर अड़े हुए थे. हमने उनसे कहा कि हमारे रिश्तेदार ऑनलाइन भुगतान करेंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि यह नहीं किया जा सकता क्योंकि कोई मोबाइल संपर्क (कनेक्टिविटी) उपलब्ध नहीं है. बचाव दल का नेतृत्व कर रहे काजा के अतिरिक्त उपायुक्त राहुल जैन ने कहा कि कुंजुम दर्रे के पास सड़क पर तीन से चार फुट बर्फ है और उसे हटाने का काम जारी है. मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कहा था कि सभी फंसे हुए पर्यटकों को बुधवार तक निकाल लिया जाएगा और इस कार्य के लिए छह हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि प्राकृतिक आपदा की वजह से पहाड़ी राज्य को अनुमानित 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

टैग: पानी की बाढ़, Himachal pradesh

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