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विपक्षी एकता के लिए जरूरी है बिहार, कभी नहीं हुआ रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का शिकार: RJD सांसद मनोज झा

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पटना. महाराष्ट्र की राजनीतिक घटनाक्रम ने बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन में संभावित विभाजन की अटकलें बढ़ा दी हैं. हालांकि इन अटकलों को सत्ता दल के नेता लगातार खारिज करते आ रहे हैं. इसी कड़ी में आरजेडी सांसद मनोज झा ने बिहार में संभावित टूट से इनकार करते हुए कहा कि बिहार कभी भी “रिसॉर्ट राजनीति” में नहीं पड़ा है और यह “विपक्षी एकता का आधार” होगा. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता ने यह भी कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के चेहरे की दौड़ में नहीं हैं, और कहा कि यह प्रयास भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के खिलाफ एक “प्रगतिशील एजेंडा” प्रदान करने की दिशा में है.

बिहार कभी भी रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का शिकार नहीं हुआः मनोज झा
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मनोज झा ने कहा, ‘बिहार कभी भी रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का शिकार नहीं हुआ है, अगर कोई बदलाव हुआ भी है तो वह बहुत सहजता से हुआ है. यह लोकतंत्र का चेहरा है. मैं उनसे कहना चाहता हूं. चिंता न करें, बिहार सुरक्षित है और विपक्षी एकता इसका आधार बनेगा.’ बता दें कि शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में हाल ही में हुए विभाजन में, अजीत पवार सहित पार्टी के नेता महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) गठबंधन में शामिल हो गए. तब से, बिहार भाजपा के कई नेता सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) में विभाजन की भविष्यवाणी करते हुए बयान दे रहे हैं.

बिहार विपक्षी एकता स्थापित करने में सबसे आगे रहेगाः मनोज झा
मनोज झा ने कहा, ‘मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि बिहार बड़ी विपक्षी एकता और भाजपा के खिलाफ सकारात्मक एजेंडा स्थापित करने वाली घटनाओं में सबसे आगे रहेगा. मैं प्रधानमंत्री का चेहरा पढ़ सकता हूं, वह एक चिंतित व्यक्ति हैं. उनका चिंतित होना सही है. पहली बार उनके चारों ओर का प्रभामंडल हिल रहा है.’ इसके अलावा नीतीश कुमार के विपक्ष का प्रधानमंत्री पद का चेहरा होने और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बिहार का मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर झा ने कहा कि ये अटकलें हैं.

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव प्रमुख भूमिका निभाएंगेः सांसद मनोज झा
उन्होंने कहा, ‘1977 में कोई विपक्ष का चेहरा नहीं था, 2004 में कोई चेहरा नहीं था. बीजेपी को देखो, एक चेहरा सर्वोच्च है. कैबिनेट का कोई मतलब नहीं है. क्या हम उस तरह की स्थिति चाहते हैं? लड़ाई इन दो विकल्पों के बीच है, और नीतीश जी और तेजस्वी दोनों प्रमुख भूमिका निभाएंगे. लेकिन विचार व्यक्तिगत संतुष्टि की ओर देखने का नहीं है.’ बता दें कि जनता दल-यूनाइटेड (जेडी-यू), जिसने पिछले साल बिहार में भाजपा के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया और राजद से हाथ मिला लिया, अगले साल के आम चुनाव से पहले विपक्षी दलों को एक साथ लाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है.

बिहार में विपक्ष के तौर पर बैठना भाजपा के लिए एक बुरा सपना हैः मनोज झा
मनोज झा ने कहा कि बिहार में महागठबंधन सरकार का सत्ता में आना और हाल ही में पटना में विपक्ष की बैठक भाजपा के लिए “बुरे सपने” थे, जो इस तरह की अटकलों को हवा दे रही है. उन्होंने उन नेताओं के साथ गठबंधन बनाने के लिए प्रधानमंत्री पर भी कटाक्ष किया, जिन्हें उन्होंने अतीत में भ्रष्ट कहा था. राजद सांसद मनोज झा ने कहा, “यह वास्तव में दुखद है कि देश के प्रधान मंत्री भोपाल में एक राजनीतिक दल के भ्रष्ट नेताओं के बारे में कुछ बयान देते हैं. 72 घंटों के भीतर, उनमें से एक को डिप्टी सीएम नामित किया गया था. यह मोदी जी और भाजपा की नई कार्यप्रणाली बन गई है.

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