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कौन है ED चीफ संजय मिश्रा, जिन्होंने 15 नेताओं को पहुंचाया सलाखों के पीछे

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मधुपर्णा दास

नई दिल्‍ली. प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक संजय मिश्रा का कार्यकाल इस महीने 31 जुलाई को खत्‍म होने जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऐसा किया जा रहा है. सर्वोच्‍च अदालत ने उन्‍हें तीसरी बार दिए गए एक्‍सटेंशन को अवैध करार दिया. हालांकि इसके बादजूद वो साढ़े चार साल तक ईडी के निदेशक के पद पर कार्यरत रहे. इस दौरान वो पूर्व वित्‍त मंत्री पी चिदंब्रम, दिल्‍ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित कुल 15 नामी चेहरों को सलाखों के पीछे भेज चुके हैं.

जम्‍मू कश्‍मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्‍दुल्‍ला, तमिलनाडु सरकार के मंत्री सेंथिल बालाजी, बंगाल के मंत्री पर्थ चैटर्जी और एक दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारियों को भी संजय मिश्रा के कार्यकाल के दौरान ही जेल में भेजा गया. संजय मिश्रा इंडियन रेवेन्‍यू सर्विस के अधिकारी हैं. वो प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के पद पर अपना पांचवां साल पूरा कर रहे थे. उन्‍हें इस पर तीसरी बार एक्‍सटेंशन दिया गया था. इस पद पर अधिकांश चार साल ही कोई अधिकारी रह सकता है. इसके बावजूद उन्‍हें बीते वर्ष एक्‍सटेंशन दिया गया था.

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बड़े-बड़े नेताओं पर लिया एक्‍शन
भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुखों में संजय मिश्रा सबसे कुशल और प्रधानमंत्री कार्यालय के सबसे करीबी माने जाते हैं. उन्‍होंने कई राजनेताओं, नौकरशाहों और धोखेबाज कॉरपोरेट्स पर एक्‍शन लिया है. मिश्रा के नेतृत्व में चारा घोटाले के आरोपी लालू प्रसाद यादव पर कार्रवाई हुई. भारत ने शायद ही ईडी से जुड़े मामले में किसी मुख्यमंत्री या पूर्व गृह मंत्री जैसे वरिष्ठ राजनेता को गिरफ्तार होते देखा हो. ईडी जिन 726 मामलों की जांच कर रही है, उनमें से 181 नेताओं से संबंधित हैं. इन सभी में मामलों ट्रायल जारी है.
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मिश्रा के लिए कानून में किया गया परिवर्तन
साल 2018 में संजय मिश्रा को पहली बार ईडी चीफ बनाया गया था. पिछले साल नवंबर में उन्‍हें एक साल का एक्‍सटेंशन दिया गया. सरकार पिछले साल एक अध्‍यादेश लेकर आई थी, जिसमें ईडी और सीबीआई चीफ के कार्यकाल को बढ़ाकर पांच साल करने की बात कही गई थी. इसके बाद दिसंबर में संसद में बिल लाकर इसे कानूनी रूप दिया गया था. मिश्रा को एक सख्‍त अधिकारी के तौर पर जाना जाता था जो कभी किसी भी मंत्री से मिलने को तैयार नहीं होते थे. तेजी से भ्रष्‍टाचार के मामलों की जांच के लिए उन्‍हें जाना जाता है. यही वजह है कि केंद्र सरकार से उन्‍हें बार-बार एक्‍सटेंशन मिलते रहे.

टैग: प्रवर्तन निदेशालय, Sanjay Mishra, सुप्रीम कोर्ट

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