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दुबई में इलाज करा थक चुकी थीं महिला, देसी डॉक्टर ने मौत के मुंह से ऐसे बचाया, जानें दिलचस्प कहानी

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हाइलाइट्स

दुबई में महिला की बीमारी का पता नहीं चला, यहां एंडोस्कोपी से पता चला कि महिला दुर्लभ बीमारी इंसुलिनोमा से पीड़ित थीं.
महिला के पेट में ट्यूमर को निकालना है तो अगले ही दिन ऑपरेशन किया गया. महिला अब पूरी तरह स्वस्थ हैं.

दुबई बेस महिला सर्वाइव इंसुलिनोमा: कभी-कभी छोटी सी परेशानी कितनी बड़ी बीमारी बन जाती है लोग इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते. दुबई की एक महिला को कभी-कभी धड़कन की समस्या होने लगी. सांसें तेज चलने लगी. इसके साथ ही कंपकंपी भी होने लगी. धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ती चली गई. बाद में वह बेहोश होने लगी. इसके बाद उसने दुबई में कई डॉक्टरों से दिखाया. डॉक्टरों ने एमआरआई, सीटी स्कैन सहित कई जांच करवाएं लेकिन कोई खास परिणाम सामने नहीं आया. डॉक्टरों ने अनुमान लगाया कि उसे कुछ विटामिन की कमी है. इस तरह उसे मल्टीविटामिन सप्लीमेंट लेने की सलाह दी गई. महिला ये गोलियां खाती रही लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा. अंत में वह भारत आई तो जांच के दौरान ऐसी बीमारी निकली कि सबके होश उड़ गए.

महिला में एक्टोपिक इंसुलिनोमा मिला
दरअसल, उसे नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया. सीटी स्कैन और एमआरआई में पाए गए कुछ संदेहों के आधार पर गैस्ट्रो विभाग में इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड पेनक्रिएटिक बिलीएरी साइंसेज के कंसल्टेंट डॉ. श्रीहरि अनिखिंडी ने एडवांस एंडोस्कोपिक प्रोसीड्योर यानी एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड किया. इस जांच में ऐसी चीज का पता चला जिससे सबके होश उड़ गए. उस महिला में एक्टोपिक इंसुलिनोमा (ectopic insulinoma)की बीमारी पाई गई.

डॉ. श्रीहरि अनिखिंडी ने बताया कि जब हमने एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड किया तो महिला के पेट में पैनक्रियाज से बाहर छोटे-छोटे ट्यूमर पाए गए जिसे एक्टोपिक इंसुलिनोमा कहा जाता है. उन्होंने कहा कि एक्टोपिक इंसुलिनोमा एक दुर्लभ बीमारी है जो कैंसर की तरह होती है. पूरी दुनिया में एक्टोपिक इंसुलिनोमा के मामले में मुश्किल 10-15 ही अब तक आए होंगे. चूंकि इसके कोई लक्षण और कारण भी अब तक नहीं पता, इसलिए इस बीमारी का जल्दी पता लगाना भी मुश्किल होता है.

सीटी स्कैन से पता नहीं चला
डॉ. श्रीहरि अनिखिंडी ने बताया कि एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मशीन पेट की बारीक से बारीक चीजों को बहुत नजदीक से देख लेती है. इससे कुछ भी छुपना मुश्किल है. लेकिन मुश्किल यह थी कि महिला के पैंक्रियाज में ट्यूमर नहीं था बल्कि पैंक्रियाज से बाहर बहुत छोटा ट्यूमर था. आमतौर पर सीटी स्कैन या एमआर पैंक्रियाज के अंदर फोकस करता है, इस कारण इसकी स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आ पाती थी. डॉ. श्री हरि ने बताया कि इसे खोजना बहुत जरूरी था.

एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड में हमने इसे ढूंढ निकाला. एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड में बायोप्सी के लिए सेल को भी निकाला जा सकता है जिसके कारण सेल के परीक्षण (FNAC) से पूरी तरह तय हो जाता है कि मरीज को वास्तव में है क्या. दुबई की इस मरीज में हमने बहुत छोटा ट्यूमर पाया जो 1.4 सेंटीमीटर का था. डॉ. श्रीहरि ने कहा, “हमने इतने छोटे ट्यूमर से सैंपल निकाला और इसे माइक्रोस्कोप में देखकर पता लगाया.” इसमें इंसुलिनोमा पाया गया.

महिला पूरी तरह से स्वस्थ
डॉ. श्री हरि अनिखिंडी ने बताया कि जब पूरी तरह तय हो गया है कि महिला के पेट में ट्यूमर को निकालना है तो अगले ही दिन ऑपरेशन किया गया. ऑपरेशन सफल रहा और मरीज अब पूरी तरह सही है. वह अब सामान्य दिनचर्या में रह सकती है.

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