Home Film Review Detail Review ‘Vikram’: लोकेश कनकराज से निर्देशन सीखना हो तो ‘विक्रम’ देखिए

Detail Review ‘Vikram’: लोकेश कनकराज से निर्देशन सीखना हो तो ‘विक्रम’ देखिए

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‘विक्रम’ की विस्तृत समीक्षा: पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं ऐसी कहावत है और ऐसा ही कुछ हुआ तमिल फिल्मों के निर्देशक लोकेश कनकराज के साथ. फैशन टेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन, फिर एमबीए के बाद बैंक में नौकरी के बाद एक दिन लोकेश कनकराज क्लबेस शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के लिए अपनी बनाई एक शॉर्ट फिल्म “अचम थवीर” भेजते हैं जहां उन्हें बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट फिल्म और बेस्ट एक्टर का खिताब मिलता हैं. सफलता से प्रोत्साहित होकर ऑल इंडिया कॉर्पोरेट फिल्म कॉम्पीटीशन में अपनी अगली शॉर्ट फिल्म “कस्टमर डिलाइट” भेजते हैं और फिर से बेस्ट फिल्म का खिताब पाते हैं.

इस कॉम्पीटीशन में एक जज होते हैं जनाब कार्तिक सुब्बाराज जो लोकेश से उम्र में तो सिर्फ तीन साल बड़े हैं लेकिन इनकी फिल्में जैसे पिज़्ज़ा, जिगरठण्डा, पेट्टा, जगमे थंडीरम और महान अपने आप में इनकी सफलता की कहानियां सुनाती हैं. कार्तिक ने लोकेश की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें राय दी कि उन्हें अब फीचर फिल्म बनानी चाहिए. लोकेश ने इस सलाह पर काम करना शुरू किया और कार्तिक सुब्बाराज की ही अन्थोलॉजी फिल्म “अवियल” में एक “कालम” नाम की शॉर्ट फिल्म निर्देशित की.

किस्मत बदलने में देर लगती होगी लेकिन प्रतिभा को सामने आने में तो कतई नहीं लगती. इसी साल उन्होंने एक बेहतरीन फिल्म “मानगरम” प्रस्तुत की. फिल्म की कहानी एक साथ कई ट्रैक्स पर चलती है लेकिन केंद्रबिंदु पर आकर ही ख़त्म होती हैं. फिल्म में किसी भी मुख्य कलाकार का कोई नाम नहीं बताया जाता लेकिन दर्शक हर एक से जुड़े रहते हैं. फिल्म सफल थी. इसके बाद उन्होंने निर्देशित की सुपरहिट फिल्म कैदी. इसके बाद आई उनकी एक और सुपरहिट फिल्म “मास्टर”. अब उनकी ताज़ा तरीन फिल्म “विक्रम” जो बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने के बाद डिज्नी+ हॉटस्टार पर रिलीज़ की गई है, जटिल कहानियों को एंटरटेनिंग तरीके से दिखाने की उनकी कला का एक बेहतरीन नमूना है. विक्रम इस साल की सबसे सफल तमिल फिल्म है.

बॉक्स ऑफिस पर 3 जून 2022 को रिलीज़ हुई विक्रम ने बॉक्स ऑफिस के कई रिकॉर्ड्स को तोड़ने की कसम खा ली थी, लेकिन सिनेमाघरों में प्रदर्शन ख़त्म होने से पहले ही इसे डिज्नी+ हॉटस्टार पर रिलीज़ कर दिया गया. कहानी एकदम सरल सी है लेकिन इसमें कुछ ऐसी खूबियां हैं जो फिल्म निर्देशन सीखने वालों को ठीक से देखनी चाहिए. कहानी में घटनाओं के ज़रिये कथानक को दर्शकों तक पहुंचाया गया है यानी किसी वॉइस ओवर की मदद से या किसी सूत्रधार की मदद से कहानी का निचोड़ पहले ही बता नहीं दिया जाता. कहानी में कई फिल्मों और सफल वेब सीरीज को ट्रिब्यूट दिया गया है, ताकि युवा दर्शकों से कमल हासन के फैंस तक, सब इस फिल्म से पूरी तरह जुड़ जाएं.

भारतीय फिल्मों में ब्लैक ऑप्स या गुप्त विभाग के ऑपरेशन्स पर बहुत थोड़ा काम किया गया है, लेकिन विक्रम में ब्लैक ऑप्स को बड़े ही सलीके से दिखाया गया है. 1986 में कमल हासन ने “विक्रम” नाम की ही फिल्म की थी. उस फिल्म में भी कई ख़ास बातें थी. वह फिल्म डिंपल कपाड़िया की पहली तमिल फिल्म भी थी. पुरानी विक्रम में भी कमल हासन को रॉ कमांडर के रोल में दिखाया गया था और इस वाली विक्रम में वो 1987 में बनी ब्लैक ऑप्स टीम के हेड हैं. नई वाली विक्रम, पुरानी वाली विक्रम को निर्देशक लोकेश कनकराज का सलाम कहा जा सकता है.

फिल्म में कमल हासन तो कमाल के हैं ही लेकिन जिन दो कलाकारों ने स्क्रीन को हिला के रखा है वो है मलयालम सुपरस्टार फहाद और तमिल-तेलुगू-मलयालम फिल्मों के अव्वल दर्ज़े के अभिनेता विजय सेतुपति. कमल हासन के अभिनय के बारे में कुछ कहना ही गलत होता है लेकिन फिल्म की सफलता ने कमल की ज़िंदगी पर क्या अद्भुत प्रभाव डाला है. फिल्म हिट होने के बाद एक इंटरव्यू में कमल ने कहा कि बतौर प्रोड्यूसर जो वो कमाएंगे उस से वे अपने सारे कर्ज़े उतरेंगे और बढ़िया खाना खाएंगे. सब जानते हैं कि कमल की पिछली कई फ़िल्में बड़े बजट की सुपर फ्लॉप रही हैं ठीक हिंदी फिल्मों में देव आनंद की तरह.

फहाद के बारे में कमल का कहना है कि वो पता नहीं कैसे एकदम बेहतरीन स्क्रिप्ट चुन लेते हैं और फिल्म में कितना भी छोटा रोल हो, पूरा स्क्रीन खा जाते हैं. फहाद की अभिनय प्रतिभा को इस से बेहतर समझाया नहीं जा सकता. विजय सेतुपति भी फहाद की ही तरह अद्भुत हैं. उनकी स्क्रीन प्रजेंस ही खतरनाक लगती है. इस फिल्म में भी वो कभी हार नहीं मानते लेकिन आखिर में सच के सामने उनका वीभत्स चेहरा भी हार मान जाता है. कमल अपने गुरु निर्देशक के. बालाचंदर को याद करते हुए कहते हैं कि फिल्म में स्क्रीन पर दिखते रहना ज़रूरी नहीं है. ज़रूरी है फिल्म को एक बेहतरीन भोजन की तरह प्रस्तुत करना जिसमें सभी कलाकारों की क्षमता मिली हो ताकि देखने वाले का पेट और मन पूरा भर जाए.

फिल्म में सिनेमेटोग्राफी गिरीश गंगाधरन जैसे प्रतिभाशाली और सफल ने की है. गिरीश ने जलीकट्टू, कोल्ड केस, सरकार और अन्गामाली डायरीज जैसी लाजवाब फिल्मों में अपने कैमरे के जौहर दिखाए हैं. इस फिल्म में एक्शन सीक्वेंस और चेस सीक्वेंस में गिरीश का कैमरा एक बार फिर अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाता है. लोकेश की सभी फिल्मों के एडिटर फिलोमिन राज (मानगरम, कैदी, मास्टर) ने जय भीम के बाद एक बार फिर एक बहुत बड़ी कहानी को अपनी लाजवाब एडिटिंग से जोड़े रखा है. फिल्म में कई ट्रैक हैं लेकिन केंद्रबिंदु पर ला कर सभी सहकथाओं को विक्रम की कथा से जोड़ना, एक दुरूह कार्य था लेकिन एडिटर ने इस फिल्म को एक पल के लिए ट्रैक से उतरने या बोझल होने नहीं दिया.

फिल्म पूरी तरह से कमर्शियल है लेकिन फिल्म में सभी डिपार्टमेंट अंतर्राष्ट्रीय स्तर की फिल्मों की टक्कर के हैं. एक्शन कोरियोग्राफर जुड़वां बंधू अंबु और अरिवु ने जिस स्केल की एक्शन इस फिल्म में दिखाई है वो देख कर ही समझ सकते हैं कि दक्षिण भारत में एक्शन का स्तर कहां पहुंच गया है. फिल्म में तमिल सुपरस्टार सूर्या का आना फिल्म को एक अलग ही दिशा देता है. जिस अंदाज़ से सूर्या के आने पर फिल्म का पोस्ट क्लाइमेक्स शॉट लिया गया है उस से साफ़ ज़ाहिर है कि इस फिल्म के कई सीक्वल बनाये जाएंगे और कमल खुद सूर्या को विक्रम के तीसरे हिस्से में कल्पना कर चुके हैं. फिल्म में अर्जुन दास भी हैं जो लोकेश की फिल्म कैदी और मास्टर में थे. हालांकि उनका रोल इस फिल्म में छोटा सा है लेकिन फिल्म के सिक्वेल्स में उन्हें बड़ा रोल मिलेगा इसकी गारंटी है.

विक्रम में एक सीन में कैदी को पुलिस की वैन में ले जाने का दृश्य कुछ इस तरह से फिल्माया और शामिल किया गया है कि दर्शकों को लोकेश की पुरानी फिल्म “कैदी” की याद आ ही जायेगी. फिल्म के क्लाइमेक्स में भी कैदी फिल्म के मुख्य किरदार दिल्ली (कार्थी) का ज़िक्र आ जाता है. वैसे भी कहा ये जा रहा है कि मार्वल सिनेमेटिक यूनिवर्स की ही तरह लोकेश सिनेमेटिक यूनिवर्स भी बन रहा है और लोकेश की सभी फिल्मों को इस तरह से लिखा जा रहा है कि वे आपस में जुडी हुई नज़र आएं. विक्रम की पटकथा लोकेश और उनके साथी रत्न कुमार (मास्टर) ने लिखी है.

फिल्म में अनिरुद्ध का संगीत है और हमेशा की तरह लाजवाब है. पहला ही गाना कमल पर फिल्माया है और इसे गाया भी कमल ने ही है. अचानक ही 80 और 90 के दशक की कमल हासन की फिल्मों की याद आ गए. 68 वर्षीय कमल को नाचते देख कर याद आता है कि कमल ने कई सालों तक असिस्टेंट कोरियोग्राफर का काम किया है और ऐसी कई फिल्मों में अभिनय किया है जहां उनकी नृत्यकला ही फिल्म का आधार थी. अभी भी उनका जलवा बरकरार है. दो अंग्रेजी गाने हैं “वेस्टेड” और “वन्स अपॉन अ टाइम”. विक्रम का हाई एनर्जी टाइटल ट्रैक अनिरुद्ध और सिद्धार्थ महादेवन ने गाया है. फिल्म के हिंदी वर्शन में एक शेर हो तुम गाना ज़ुबिन नौटियाल की आवाज़ में है और क्या लाजवाब गीत है. कमाल की बात ये है कि इस फिल्म के दो गीत लोकेश के असिस्टेंट विष्णु ने लिखे हैं.

बड़े लम्बे अर्से के बाद कोई ऐसी फिल्म आयी है जो कि बॉक्स ऑफिस पर तो धमाल मचा ही रही है लेकिन ओटीटी पर भी दर्शक इसे देखे ही जा रहे हैं. ये फिल्म हॉलीवुड की फिल्मों की टक्कर की बनायीं गयी है. लोकेश की अब तक की सारी फिल्में सफल रही हैं उसका कारण है कि वे फिल्म बनाने के अपने उद्देश्य अर्थात मनोरंजन को नहीं भूलते लेकिन वे फिल्म में उतने ही फॉर्मूले डालते हैं जो दर्शक झेल सकें. कमल हासन का बटरफ्लाई ट्रिगर वाली रूसी मशीन गन वाले सीन देख कर फिल्म की भव्यता का अनुमान लगाया जा सकता है. दक्षिण भारतीय निर्देशक लगातार एक से बढ़कर एक फिल्में प्रस्तुत करते जा रहे हैं जहां कहानी और मनोरंजन का अद्भुत तालमेल देखने को मिलता है. विक्रम एक लाजवाब थ्रिलर है, इसे देखिये एक बार फिर लोकेश की निर्देशकीय क्षमता का लोहा मान लेंगे और अगर नहीं देखी होगी तो उनकी पुरानी फिल्में देखने के लिए प्रेरित हो जायेंगे.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
स्क्रिनप्ल :
डायरेक्शन :
संगीत :

टैग: छवि समीक्षा, कमल हासन

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