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REVIEW: इंडियन क्रिकेट टीम के जुनून और जज्बे की कहानी है ‘बंदों में था दम’

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‘बंदों में था दम’ समीक्षा: दुनियाभर में क्रिकेट प्रमियों की कमी नहीं है और अब तो क्रिकेट मैच लाइव देखना और भी आसान हो गया है, जब से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इसका सीधा प्रसारण किया जाने लगा है. अब तो क्रिकेट को पसंद करने वाले अपने मोबाइल पर ही लाइव मैच देखने लगे हैं. वैसे, जब से आईपीएल की शुरुआत हुई है, तब से देशभर में भी क्रिकेट के प्रति लोगों का प्यार देखते ही बन रहा है. क्रिकेट पर बेस्ड जितनी भी फिल्में बनी हैं, उन्हें दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है.

इसी कड़ी में वूट (VOOT) ने हाल ही में क्रिकेट पर बेस्ड एक सीरीज रिलीज की है, जिसका नाम ‘बंदों में था दम’ है, जो 4 एपिसोड का एक डॉक्यूमेंट्री. बता दें, इस सीरीज में इंडियन क्रिकेट टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे को ऐतिहासिक बताने और बनाने की कोशिश है. दरअसल, बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के नाम से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट मैच सीरीज होती है और इसके पीछले मैचों के दौरान जब टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया में थी, तो अपने परफॉर्मेंस की वजह से दर्शकों और पत्रकारों के निशाने पर रही थी.

इन्हीं सब परिस्थितियों से उबरने की कहानी है ‘बंदों में था दम’, जहां इंडियन क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों का जुनून और जब्जा देखने को मिला. शुरुआती एपिसोड भारत में हर क्रिकेट प्रशंसक के लिए एक दुखदायी बिंदु है, जहां वे एडिलेड में अपनी टीम को 36 रन पर समेटते हुए देखते हैं (टेस्ट इतिहास में उनका सबसे कम स्टोर). रहाणे उस एपिसोड के दौरान आकर्षण का केंद्र हैं, जहां वह इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि कैसे पहली पारी में विराट कोहली के रन आउट (जो उसके कारण हुआ) ने ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में गति को पूरी तरह से बदल दिया.

कोहली (जो उस समय भारत के कप्तान थे) को पहले टेस्ट के बाद पैटरनिटी लीव दिया गया था और उनके डिप्टी रहाणे ने शेष दौरे के लिए वहां से कार्यभार संभाला था. हर कोई रहाणे को याद करता है, जिन्होंने उस प्रतियोगिता में एक यादगार शतक बनाया था और साथ ही भारत की जबरदस्त जीत के लिए जो मंच उन्होंने तैयार किया था, उसके लिए भी रहाणे की काफी सराहना की गई थी. लेकिन, इस वेब सीरीज में खुलासा किया गया कि उस दौरान रहाणे पीठ में गंभीर खिंचाव के कारण पारी से पहले बल्लेबाजी करने के लिए पूरी तरह से फिट नहीं थे.

अंतिम कड़ी हनुमा विहारी और रविचंद्रन अश्विन की जोड़ी द्वारा प्रदर्शित धैर्य और दृढ़ संकल्प की कहानी थी. कैसे दो घायल खिलाड़ियों ने विश्व क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आक्रमणों में से एक के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया और भारत के लिए मैच बचाया यह देखने की कहानी है. डॉक्यूमेंट्री में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की भावनाओं को बहुत अच्छी तरह से प्रदर्शित किया गया है. एपिसोड की समाप्ति के बाद बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी उठाने के अभूतपूर्व क्षण को याद करते हुए रहाणे थोड़ा भावुक हो जाते हैं. बता दें, निर्देशक नीरज पांडे इस ऐतिहासिक जीत की यादों को वापस लाने में कामयाब रहे हैं.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
स्क्रिनप्ल :
डायरेक्शन :
संगीत :

टैग: समीक्षा, वेब सीरीज

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